हरिद्वार, 17 अक्टूबर। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ‘सेवा संकल्प अभियान–विकसित भारत-2047’ के अंतर्गत एक माह तक आयोजित शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का भव्य समापन समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पांडे ने की। पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल मुख्य अतिथि तथा डॉ. ललित नारायण मिश्र सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश राणा की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता अवस्थी ने किया।
समारोह में अभियान की नोडल अधिकारी प्रो. बिंदुमती द्विवेदी ने एक माह के दौरान आयोजित गतिविधियों की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की। उन्होंने अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों की सहभागिता और विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से विकसित किए गए सेवा, समर्पण तथा राष्ट्रनिर्माण के भावों की जानकारी दी।
सेवा और राष्ट्रहित को जीवन का अभिन्न अंग बनाएं युवा: कुलपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. रमाकान्त पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों को सेवा और राष्ट्रहित को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को व्यक्तिगत लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ समाज के कल्याण और राष्ट्र की प्रगति के लिए भी निरंतर प्रयास करना चाहिए। सेवा संकल्प अभियान जैसे कार्यक्रम युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता और कर्तव्यबोध विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समाजसेवा मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा जीवन-मूल्य: पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने कहा कि समाजसेवा केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा जीवन-मूल्य है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, ज्ञान और ऊर्जा का उपयोग समाज के जरूरतमंद वर्गों के उत्थान तथा राष्ट्र की प्रगति के लिए करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपने कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
भारतीय संस्कृति में सेवा, परोपकार और लोककल्याण का विशेष महत्व: डॉ. ललित नारायण मिश्र
सारस्वत अतिथि डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सेवा, परोपकार, त्याग और लोककल्याण को विशेष महत्व दिया गया है। विद्यार्थियों को इन मूल्यों को अपने आचरण में अपनाते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न रखते हुए चरित्र निर्माण, सामाजिक चेतना और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
कुलसचिव दिनेश राणा ने अभियान के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हैं। सामूहिक सहभागिता से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित होती है। उन्होंने अभियान की सफलता में योगदान देने वाले शिक्षकों, संयोजकों, निर्णायकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
11 प्रमुख गतिविधियों के माध्यम से दिया सेवा और राष्ट्रनिर्माण का संदेश
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘मेरे सपनों का भारत’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा मेरा संकल्प’, ‘सेवा के रंग राष्ट्र के संग’ तथा ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे विषयों पर आधारित 11 प्रमुख गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें चित्रकला प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, ‘वोकल फॉर लोकल’ जागरूकता रैली, सेवा संकल्प जागरूकता एवं सामाजिक शिक्षण गतिविधि, रंगोली प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, क्रीड़ा कार्यक्रम तथा योगासन कार्यक्रम शामिल रहे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों के प्रति जागरूकता और राष्ट्रनिर्माण में सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।
चित्रकला, भाषण और निबंध प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने हासिल किए स्थान
चित्रकला प्रतियोगिता में सूरज चंद्र भट्ट ने प्रथम, भारती शर्मा ने द्वितीय तथा आदर्श कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में अनुज कुमार प्रथम, हर्षिता द्वितीय तथा आदर्श कुमार तृतीय स्थान पर रहे।
निबंध प्रतियोगिता में वंश शर्मा एवं अनिता ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि आतिका द्वितीय और अंकित सेमेल्टी तृतीय स्थान पर रहे। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता, अभिव्यक्ति कौशल और विकसित भारत की संकल्पना के प्रति अपनी सोच का प्रदर्शन किया।
रंगोली में ‘मेरे सपनों का भारत’ और ‘2047 का भारत’ की दिखी झलक
रंगोली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने ‘मेरे सपनों का भारत’ तथा ‘2047 का भारत’ की संकल्पना को रंगों और कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में सूरज, मानसी, अनुज, अभिनव एवं सुयश के समूह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। अंकित सेमेल्टी, अनुज रतूड़ी, आदर्श कुमार, सूरज चंद्र भट्ट एवं अनुज थपलियाल के समूह ने द्वितीय स्थान हासिल किया, जबकि अभिषेक सेमेल्टी, खीमेश परगाई, मनीष भट्ट एवं प्रदीप जोशी के समूह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
सामूहिक प्रयासों से सफल हुआ एक माह का अभियान
समारोह के अंत में सह-नोडल अधिकारी श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एक माह तक आयोजित गतिविधियों की सफलता सभी के सामूहिक प्रयास, समर्पण और सक्रिय सहभागिता का परिणाम है। विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रनिर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।
इस अवसर पर प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी, प्रो. अरविंद नारायण मिश्रा, डॉ. अजय परमार, डॉ. विनय सेठी, डॉ. उमेश शुक्ल, डॉ. रूपेश शर्मा, श्री राजेंद्र नौटियाल एवं श्रीमती अनिता कुकरेती सहित अन्य शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। राष्ट्रगान एवं शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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